सतना में एक भाई ऐसा भी.. बुरे समय में निभाया 'रक्षा का बंधन', जाति-धर्म और समाज से उठकर निभाई जिम्मेदारी

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किसी की पढ़ाई न रुके, किसी के सिर से छत न छिने और किसी बेटी के हाथ पीले होने में आर्थिक संकट बाधा न बने, इसके लिए शिवा लगातार मदद का हाथ बढ़ाते रहे हैं। रक्षाबंधन पर उनकी कलाई राखियों से भर जाती है।