किसी की पढ़ाई न रुके, किसी के सिर से छत न छिने और किसी बेटी के हाथ पीले होने में आर्थिक संकट बाधा न बने, इसके लिए शिवा लगातार मदद का हाथ बढ़ाते रहे हैं। रक्षाबंधन पर उनकी कलाई राखियों से भर जाती है।