परिवाद में आरोप लगाया गया है कि लगातार शिकायतों और विभागीय कार्रवाई के बावजूद संबंधित पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई। इसी के चलते अधिवक्ता अरुणा शर्मा ने न्यायालय की शरण ली है।