देश के पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने बताया कि मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की किराना हिल्स पर अनजाने में एक ड्रोन गिर गया था। पूर्व CDS जनरल अनिल चौहान ने दिल्ली में मंगलवार को विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन के प्रोग्राम में ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद के हालात पर बात की। पूर्व CDS ने कहा- कभी-कभी सवाल उठता है कि क्या किराना हिल्स पर हमला हुआ था। हमने टारगेट ढूंढने के लिए पाकिस्तान के सरगोधा में कई ड्रोन भेजे थे। इनका काम सरगोधा और उसके आस-पास मौजूद राडार को खोजना था। उन्होंने कहा कि ड्रोन लगभग 2 घंटे तक हवा में घूमता है। उसे टारगेट नहीं मिला। हो सकता है कि ऐसा ही कोई ड्रोन जाकर अनजाने में किराना की पहाड़ियों से टकराया हो। पाकिस्तानी मीडिया ने भी तस्वीरें दिखाई थीं, जिनमें किराना हिल्स से धुआं निकलता दिख रहा था।" दावा किया जाता है कि किराना हिल्स पर पाकिस्तानी परमाणु ठिकाने हैं, लेकिन ऑपरेशन के दौरान भारतीय वायुसेना ने कहा था कि हमने उन ठिकानों को टारगेट नहीं बनाया था। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किराना हिल्स का वीडियो… भारत-पाकिस्तान सीजफायर के बाद उठे थे सवाल ऑपरेशन सिंदूर 6 और 7 मई की रात को किया गया था। तब पाकिस्तानी न्यूज वेबसाइट डॉन ने किराना हिल में भारत का एक ड्रोन गिरने का दावा किया। हालांकि, उसने न्यूक्लियर साइट पर अटैक की कोई बात नहीं की। भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर के बाद 12 मई 2025 को भारतीय सेना की प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व एयर मार्शल एके भारती से किराना हिल्स स्थित न्यूक्लियर ठिकानों के बारे में सवाल किया गया था। इस पर भारती ने कहा था- किराना हिल्स पर जो भी है, हमने वहां हमला नहीं किया। शुक्रिया हमें बताने के लिए कि किराना हिल्स में न्यूक्लियर इंस्टॉलेशन है। हमें यह नहीं पता था। एक्सपर्ट ने भी कहा था- पाकिस्तानी परमाणु ठिकानों पर हमला नहीं उस दौरान इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के प्रवक्ता फ्रेडरिक डाहल ने कहा था, ‘हमें मिली जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान में किसी भी परमाणु संयंत्र से कोई रिसाव या उत्सर्जन नहीं हुआ है।’ पूर्व CDS बोले- सरकार को विकल्प देना सेना की जिम्मेदारी जनरल चौहान ने मंगलवार को हुए प्रोग्राम में कहा- लोकतंत्र में जब सरकार अपने राजनीतिक उद्देश्यों को हासिल करने के लिए बल प्रयोग का फैसला करती है, तब सेना की जिम्मेदारी दो तरह की होती है। पहली- सरकार को बल प्रयोग के विकल्प देना है, ताकि वह अपने उद्देश्यों को हासिल कर सके। दूसरी- सरकार में भरोसा पैदा करना है, ताकि वह अपनी जरूरत के मुताबिक ज्यादा से ज्यादा विकल्प चुन सके। पाकिस्तान हमलों के नतीजों के सबूत नहीं जुटा सका पूर्व CDS चौहान ने कहा कि पाकिस्तान ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपने हमलों के नतीजों का सबूत नहीं जुटा सका। उसने चीनी कंपनियों समेत कमर्शियल सैटेलाइट से सबूत ढूंढने की कोशिश की थी, लेकिन यह साबित नहीं कर सका कि उसके हमलों से भारत में कोई टारगेट हिट हुआ। जनरल चौहान ने कहा कि सैन्य विकल्पों की संख्या अचानक तैयार नहीं होती। इसके लिए लगातार तैयारी करनी पड़ती है। इसमें कड़ी ट्रेनिंग, युद्धाभ्यास की योजना शामिल है। ऑपरेशन सिंदूर पर अब भी नजर जनरल चौहान ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर को करीब 15 महीने हो चुके हैं। इसके बावजूद ऑपरेशन का असर बना हुआ है और भारत के साथ विदेशों में भी रणनीतिक मामलों के जानकार इस पर नजर रख रहे हैं। उन्होंने कहा- ऐसे ऑपरेशन का आकलन सिर्फ सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसमें ऑपरेशन से मिली सीख, कमियों को दूर करने के कदम, युद्ध के बदलते तरीके देखना जरूरी है।