जब भक्ति के सुर हों, कृष्ण की कथा हो और पूरा सभागार एक साथ हरिनाम में डूब जाए, तो संगीत महज प्रस्तुति नहीं रहता, वह अनुभव बन जाता है एक दिव्य यात्रा की।