Auto And Cab Drivers Heart Attack Risk: ऑटो और कैब चलाने वाले लोगों की दिनचर्या अक्सर लंबे समय तक सड़क पर रहने, घंटों एक ही जगह बैठे रहने और ट्रैफिक के तनाव से भरी होती है. अब स्वास्थ्य एक्सपर्ट ने इस तरह की लाइफस्टाइलसे जुड़े हार्ट संबंधी जोखिमों पर चिंता जताई है. हेल्थ एजुकेटर प्रशांत देसाई ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए एक कर्नाटक जिले के अचानक हुई कार्डियक मौत के मामलों का जिक्र करते हुए बताया कि पिछले 20 मामलों में से 6 लोग ऑटो या कैब ड्राइवर थे. उन्होंने यह भी कहा कि जिन 24 अचानक मौत के मामलों की जांच की गई, उनमें 14 लोग 45 साल से कम उम्र के थे.देसाई ने अपने पोस्ट में ड्राइवरों की कामकाजी परिस्थितियों को लेकर चिंता जताई. उन्होंने बताया कि ऑटो और कैब ड्राइवरों को अक्सर रोजाना लंबे समय तक गाड़ी चलानी पड़ती है. घंटों बैठे रहना, ट्रैफिक और प्रदूषण का सामना करना, अनियमित नींद और लगातार तनाव उनके स्वास्थ्य पर असर डाल सकते हैं. उनका कहना है कि कई दूसरे पेशों में काम करने वाले लोगों के पास अपने काम और आराम का समय तय करने का विकल्प होता है, लेकिन ड्राइवरों की कमाई अक्सर सड़क पर बिताए गए समय से जुड़ी होती है. ऐसे में पर्याप्त आराम लेना उनके लिए मुश्किल हो सकता है.उन्होंने ड्राइवरों के लिए नियमित हेल्थ चेकअप, काम के दौरान जरूरी ब्रेक और पर्याप्त नींद को प्राथमिकता देने की जरूरत बताई. हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि केवल लंबे समय तक ड्राइविंग को अचानक कार्डियक अरेस्ट की सीधी वजह नहीं माना जा सकता. लेकिन इससे जुड़े कई कारक हृदय रोग के खतरे को बढ़ा सकते हैं.लंबे समय तक बैठने का दिल पर क्या असर पड़ता है?KIMS Hospitals, ठाणे के कार्डियक साइंसेज विभाग के निदेशक और एचओडी डॉ. बी. सी. कलमठ के अनुसार, लंबे समय तक ड्राइविंग करने से हृदय रोग से जुड़े कई स्थापित जोखिम कारकों पर असर पड़ सकता है. रोजाना 10 से 12 घंटे तक गाड़ी की सीट पर बैठे रहने का मतलब है कि काम के दौरान शारीरिक गतिविधि बेहद कम हो जाती है. View this post on Instagram A post shared by Prashant Desai (@itsprashantdesai)डॉ. कलमठ के मुताबिक, लंबे समय तक बैठने और पर्याप्त शारीरिक गतिविधि न होने से ब्लड सर्कुलेशन, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल के स्तर पर निगेटिव असर पड़ सकता है. ऑटो और कैब ड्राइवर अक्सर कई घंटों तक एक ही स्थिति में बैठे रहते हैं, जिससे शरीर की सक्रियता कम हो जाती है. लंबे समय तक बनी रहने वाली ऐसी दिनचर्या हार्ट और ब्लड वेसल्स से जुड़े जोखिमों को बढ़ा सकती है.इसके अलावा, ड्राइवरों को लगातार मानसिक तनाव का भी सामना करना पड़ता है. ट्रैफिक जाम, समय पर पहुंचने का दबाव, यात्रियों की अपेक्षाएं और कमाई को लेकर चिंता कई लोगों को लंबे समय तक तनाव की स्थिति में रख सकती है. एक्सपर्ट के अनुसार, लगातार तनाव कोरोनरी आर्टरी डिजीज समेत अन्य हृदय संबंधी समस्याओं के जोखिम कारकों में योगदान कर सकता है.प्रदूषण से बढ़ सकती है परेशानीसड़क पर लंबे समय तक काम करने वाले ड्राइवरों को वाहनों से निकलने वाले धुएं और हवा में मौजूद प्रदूषकों का भी सामना करना पड़ता है. खासकर भारी ट्रैफिक वाले इलाकों में लंबे समय तक रहने से शरीर पर प्रदूषण का असर बढ़ सकता है.डॉ. कलमठ के अनुसार, लंबे समय तक वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने से शरीर में सूजन बढ़ सकती है और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है. यह हृदय पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है. धूम्रपान करने वालों में यह जोखिम और बढ़ सकता है. वहीं, अधिक शराब का सेवन हाई ब्लड प्रेशर और दिल की धड़कन की अनियमितता से भी जुड़ा हो सकता है. एक्सपर्ट का कहना है कि जब लंबे समय तक बैठने, तनाव, प्रदूषण, खराब नींद, धूम्रपान और अन्य अस्वस्थ आदतों जैसे कई कारक एक साथ मौजूद हों, तो हार्ट और ब्लड वेसल्स पर दबाव काफी बढ़ सकता है.इसे भी पढ़ेंः Delhi NCR Health Study: दिल्ली-NCR में हर 20 में से 1 को 2 गंभीर बीमारियां! स्टडी में बड़ा खुलासाखराब नींद भी बन सकती है खतराकमाई बढ़ाने के लिए कई कैब और ऑटो ड्राइवर देर रात तक काम करते हैं या सुबह जल्दी एयरपोर्ट और दूसरी लंबी राइड के लिए निकल जाते हैं. इससे उनकी नींद का समय अनियमित हो सकता है. लगातार पर्याप्त नींद न मिलने पर ब्लड प्रेशर और तनाव से जुड़े हार्मोन बढ़ सकते हैं, जिसका असर शरीर के मेटाबॉलिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है. अनियमित या खराब नींद की वजह से शरीर को पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता. विशेषज्ञ नींद को काम के लिए कुर्बान करने के बजाय स्वास्थ्य की प्राथमिकता मानने की सलाह देते हैं. थकान दूर करने के लिए जरूरत से ज्यादा कैफीन, सिगरेट या शराब का सहारा लेना भी स्थिति को बेहतर नहीं बनाता.45 साल से कम उम्र होना पूरी सुरक्षा की गारंटी नहींडॉ. कलमठ का कहना है कि कम उम्र को देखकर हार्ट रोग के खतरे को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. 45 साल से कम उम्र के लोगों को भी हार्ट हेल्थ को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है, खासकर अगर उनकी दिनचर्या में लंबे समय तक बैठना, तनाव, खराब नींद या अन्य जोखिम कारक शामिल हैं. ड्राइवरों को सीने में दबाव या बेचैनी, सांस फूलना, असामान्य पसीना आना, चक्कर आना या बेहोशी, दिल की तेज या अनियमित धड़कन, बिना वजह ज्यादा थकान और दर्द का हाथ, कंधे, पीठ या जबड़े तक फैलना जैसे संकेतों को गंभीरता से लेना चाहिए. अगर ये लक्षण नए हों, गंभीर हों या लगातार बने रहें, तो तुरंत मेडिकल जांच करानी चाहिए. यदि सीने में तकलीफ के साथ सांस फूलना, ज्यादा पसीना आना या बेहोशी जैसे लक्षण हों, तो खुद गाड़ी चलाकर अस्पताल जाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए.लंबे घंटे काम करना जरूरी हो तो क्या करें?एक्सपर्ट लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से बचने की सलाह देते हैं. अगर संभव हो तो हर एक से दो घंटे के बीच छोटा ब्रेक लेकर कुछ देर चलें, स्ट्रेचिंग करें और पैरों को सक्रिय रखें. काम के अलावा नियमित शारीरिक गतिविधि भी जरूरी है. फिटनेस और स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार तेज चलना या अन्य एरोबिक एक्सरसाइज के साथ स्ट्रेंथ ट्रेनिंग की जा सकती है.इसे भी पढ़ेंः Smoking Side Effects: क्या पहली ही सिगरेट से खराब होने लगते हैं फेफड़े? जानें सचDisclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.