भारत में चीनी लंबे समय से राजनीतिक रूप से संवेदनशील उत्पाद रही है, क्योंकि इसका असर उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों पर पड़ता है.