तमिलनाडु में इस फैसले का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाना और ग्रामीण श्रमिकों को अतिरिक्त काम उपलब्ध कराना है। सीएम ने खास निर्देश दिया कि इसके तहत साल में 150 दिन तक सहायता उपलब्ध कराई जाए।