अगर किसी मरीज को चढ़ा दिया जाए दूसरे ग्रुप का ब्लड, तो क्या होगा?

Wait 5 sec.

किसी मरीज को खून चढ़ाने से पहले उसका ब्लड ग्रुप जांचना बहुत जरूरी होता है. अगर गलती से गलत ब्लड ग्रुप का खून चढ़ा दिया जाए, तो यह जानलेवा साबित हो सकता है. ऐसी स्थिति में शरीर का इम्यून सिस्टम खून की लाल रक्त कोशिकाओं पर हमला करने लगता है. इसे मेडिकल भाषा में हीमोलिटिक ट्रांसफ्यूजन रिएक्शन कहते हैं. इससे किडनी को नुकसान पहुंचता है और गंभीर मामलों में मरीज की जान भी जा सकती है. गलत ब्लड ग्रुप का खून चढ़ने पर दिखते हैं ये लक्षणगलत ब्लड ग्रुप का खून चढ़ने पर मरीज में कुछ ही समय में लक्षण दिखाई देते हैं. इसमें तेज बुखार, ठंड लगना, सीने या पीठ में दर्द, सांस लेने में परेशानी, चक्कर आना और दिल की धड़कन तेज होना शामिल हैं. कुछ मामलों में ब्लड प्रेशर अचानक कम हो जाता है और पेशाब का रंग गहरा हो जाता है. किडनी से लेकर दिल तक को हो सकता है नुकसानगलत ब्लड ग्रुप का खून चढ़ने से लाल रक्त कोशिकाएं टूटने लगती हैं. इससे निकलने वाला हीमोग्लोबिन किडनी को नुकसान पहुंचाता है. गंभीर स्थिति में किडनी फेल होने का खतरा रहता है. इसके अलावा, शरीर में खून के थक्के बनने, अंदरूनी रक्तस्राव और ब्लड प्रेशर बहुत कम होने जैसी समस्याएं भी होती हैं. अगर शरीर के जरूरी अंगों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंचती, तो उनकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है.यह भी पढ़ें : सर्दियों में बच्चों को न हो कफ, अपनाएं ये घरेलू उपाय  गलत खून चढ़ने पर डॉक्टर क्या करते हैं?अगर ब्लड ट्रांसफ्यूजन के दौरान गलत खून चढ़ने का पता चलता है, तो मेडिकल टीम तुरंत ट्रांसफ्यूजन रोक देती है. इसके बाद मरीज की हालत की जांच की जाती है और जरूरत के अनुसार इलाज शुरू किया जाता है. मरीज को नसों के जरिए तरल पदार्थ दिए जाते हैं और किडनी सहित दूसरे अंगों की निगरानी की जाती है. गंभीर मामलों में आईसीयू और डायलिसिस की जरूरत पड़ सकती है. इलाज मरीज की स्थिति और रिएक्शन की गंभीरता के आधार पर तय होता है.ब्लड चढ़ाने से पहले किन बातों का रखें ध्यान?ब्लड ट्रांसफ्यूजन से पहले मरीज की पहचान, ब्लड ग्रुप और खून की अनुकूलता की जांच करना जरूरी है. अस्पताल में खून चढ़ाते समय मरीज की निगरानी भी की जाती है. अगर खून चढ़ने के दौरान बुखार, दर्द, सांस लेने में परेशानी या अचानक घबराहट महसूस हो, तो तुरंत मेडिकल स्टाफ को बताना चाहिए. ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि समय पर इलाज मिलने से गंभीर जटिलताओं का खतरा कम किया जा सकता है.यह भी पढ़ें : क्या प्यास लगने पर ही पानी पीना चाहिए, क्या है सही तरीका?