जिंदगी बनाने के लिए बदायूं का गांव छोड़ा। सोचा था कि गाजियाबाद में मेहनत-मजदूरी और सब्जियों की खेती से परिवार की जरूरतें पूरी होंगी। बच्चों की गृहस्थी बसेगी और धीरे-धीरे जिंदगी की मुश्किलें कम होती जाएंगी।