दावा किया कि वर्ष 1910 के राजस्व रिकार्ड में खसरा नंबर 194 की करीब 30 एकड़ जमीन सरकारी दर्ज थी, लेकिन अतिक्रमण और निजी स्वामित्व बढ़ने से अब चट्टान के आसपास महज 0.8 हेक्टेयर सरकारी जमीन बची है।