यदि कोई व्यक्ति मजाक या गुस्से में भी मरने की बात करता है और उसके व्यवहार में अन्य बदलाव भी दिखाई दे रहे हैं तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए। अकेलापन, असफलता और लगातार तनाव अलग-अलग लोगों में अलग-अलग तरह से प्रभाव डालते हैं।