रियाज़ मंजिल का नाम शायद नई पीढ़ी के लिए अनजाना हो, लेकिन दीवारों से जुड़ी दास्तान बताती है।कभी भोपाल की हवेलियां और महल सिर्फ रहने की जगह नहीं थे वे इल्म, अदब, इलाज और विचारों के भी ठिकाने हुआ करते थे।