गांव के बुजुर्गों के अनुसार, नारियल फेंकने का यह आयोजन केवल मनोरंजन या खेल का जरिया नहीं था, बल्कि यह ग्रामीणों के आपसी मेल-जोल और सामूहिक सहभागिता को मजबूत करने वाली एक सांस्कृतिक धरोहर रहा है।