सत्य निकेतन हादसा: नियमों की धज्जियां उड़ाते PG मालिक और देखता रहा प्रशासन

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6 सितंबर को दिल्ली के सत्य निकेतन में एक इमारत के ढहने से कई छात्र मलबे में दब गए. अब तक आई जानकारी के मुताबिक 7 की मौत की पुष्टि हो चुकी है वहीं 5 गंभीर रूप से घायल छात्र एम्स में भर्ती हैं. मामले में दिल्ली सरकार ने नगर निगम के पांच अधिकारियों को सस्पेंड किया है. पर कुछ सवाल हैं जिनके जवाब मिलने बाकी हैं. द क्विंट ने ग्राउंड पर पहुंचकर ये समझने की कोशिश की कि क्या ये महज एक हादसा है ये सालों से देखी जा रही प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा? इस रिपोर्ट में हमने इन सभी सवालों के जवाब ढूंढने की कोशिश की है. पर सबसे पहले जानते हैं कि 6 सितंबर को दोपहर 1:30 बजे सत्य नगर में क्या हुआ था ? 6 सितंबर का दिन सत्य निकेतन इलाके में एक पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई. यह इमारत छात्रों के लिए PG/हॉस्टल के तौर पर इस्तेमाल हो रही थी. बिल्डिंग मालिक हरिराम और उनके भाई आनंद ने इसका कुछ हिस्सा Hostel Daze नाम की कंपनी को लीज पर दिया था. हादसे के समय इमारत में कई छात्र मौजूद थे. रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान कई लोगों को मलबे से बाहर निकाला गया. शुरुआती घंटों में मृतकों की संख्या लगातार बढ़ती रही और बाद की रिपोर्टों के मुताबिक हादसे में कुल सात लोगों की मौत हुई. हमारी रिपोर्ट में आगे आप देखेंगे कि कैसे रेस्क्यू टीम का समय पर न पहुंचना भी एक ऐसा पहलू है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. चश्मदीदों का कहना है कि अगर समय पर बचाव कार्य शुरू हो जाता तो बहुत छात्रों की जानें बच सकती थीं.सालों से जर्जर हालत में थी बिल्डिंगसत्य निकेतन के स्थानीय रहवासी अजय बताते हैं कि वो अपनी एक्टिवा से हादसे वाले दिन उसी गली की तरफ जा रहे थे, तभी अचानक बहुत धूल उड़ी, जब धूल हटी तो पता चला कि इमारत ढह अजय ने ये भी बताया कि बिल्डिंग के बेसमेंट में कुछ काम चल रहा था, संभवत: बिल्डिंग मालिक ग्राउंड फ्लोर पर दुकानें बनाने की तैयारी कर रहे थे. अजय का ये भी कहा है कि बिल्डिंग एक तरफ झुकी हुई थी, आए दिन इसका कोई न कोई हिस्सा झड़ता दिखता था. सत्य नगर में ही रहने वाले एक कॉलेज छात्र संजीव बताते हैं कि वो घटना के तुरंत बाद वहां पहुंच गए थे. कई ऐसे छात्र बचाव कार्य में जुट गए थे, क्योंकि बचाव टीम 2 घंटे बाद घटनास्थल पर पहुंची. अजय बताते हैं कि कुछ लोगों के दोस्त इमारत के नीचे दबे हुए थे वो रोते हुए खुदाई कर रहे थे, बहुत ही दर्दनाक मंजर था. अजय ने खुद कुछ ऐसे लोगों को मलबे से निकाला जिनका आधा शरीर पत्थरों में दबा हुआ था और वो बचाने की गुहार लगा रहे थे.चश्मदीद संजीवरेंट के लालच में नियम तोड़कर बनाई गईं 5,6,7 मंजिलें इलाके में हर तीसरी बिल्डिंग को देखकर ये साफ हो रहा है कि प्रशासन सालों से नियमों की अनदेखी कर रहा है. रहवासी संजीव बताते हैं कि जिस इमारत में हादसा हुआ, उसे भी 2 साल पहले दिल्ली नगर निगम ने बताया जर्जर बताया था. पर उसके बाद क्या हुआ कोई नहीं जानता. यहां 10 हजार से लेकर 25 हजार रुपए महीने तक का रेंट छात्रों से लिया जाता है. उसके बाद भी हर वक्त जान का खतरा छात्रों पर मंडरा रहा है. मामले को पूरे विस्तार से समझने के लिए इस रिपोर्ट के शुरुआत में दिए गए वीडियो लिंक पर क्लिक करें, जहां आप हमारी ग्राउंड रिपोर्ट देख सकते हैं.