इस वर्ष देवताओं की अदालत में कुल 157 मामले प्रस्तुत किए गए। इनमें से 35 मामलों में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। यह पूरी प्रक्रिया श्रद्धा, लोकविश्वास और पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था के बीच संपन्न हुई। बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु इस अनूठी परंपरा के साक्षी बने।