विश्लेषकों का कहना है कि भारत का मुख्य लक्ष्य ब्रिक्स को पश्चिम-विरोधी समूह बनाना नहीं है, बल्कि इसे अधिक प्रतिनिधित्व वाली अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए एक विश्वसनीय मंच के रूप में मज़बूत करना है.