बीते एक साल में दुनिया भर के कई देशों में एआई के बढ़ते चलन के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हुए हैं. वहीं एक्सपर्ट्स को भी अब इसके बेकाबू होने की चिंता सताने लगी है.