स्वाइन फ्लू (एच-1 एन-1) का बदला हुआ स्वरूप अब डॉक्टरों के लिए नई चुनौती बन गया है। पहले इसका असर सिर्फ फेफड़ों तक सीमित माना जाता था, लेकिन अब यह वायरस सीधे दिल की धड़कन पर भी असर डाल रहा है।