इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले में 18 साल की बालिग युवती को अपनी मर्जी से पति के साथ रहने की अनुमति दे दी। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि बालिग व्यक्ति को अपना जीवनसाथी चुनने का अधिकार है, माता-पिता की चिंताएं बालिग की संवैधानिक स्वायत्तता पर हावी नहीं हो सकतीं।