वर्ष 2020 से शुरू हुई इस पहल के तहत अब तक 90 से अधिक बच्चों को साक्षर बनाकर औपचारिक स्कूलों में प्रवेश दिलाया जा चुका है। वर्तमान में करीब 40 बच्चे कक्षा में आते हैं।