हाई कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आदेश में कहा कि नाबालिग छात्र याचिकाकर्ताओं को अपने सहपाठियों के साथ मारपीट करने के कारण उसी स्कूल में पढ़ाई जारी रखने से रोका गया है।