यह प्रकरण एक बार फिर साबित करता है कि लोक अदालत केवल मामलों के निपटारे का मंच नहीं, बल्कि परिवारों को टूटने से बचाने और आपसी संवाद से विवाद सुलझाने का सशक्त माध्यम है।