बादशाह बनने के बाद जहाँगीर अपनी प्रजा के लिए शराब और दूसरी नशीली चीज़ों की बिक्री और उत्पादन पर पाबंदी लगा देते हैं, लेकिन उसी फ़रमान में अपनी शराबखोरी का भी इक़रार करते हैं.