भारतीय खाने में एक ही थाली में कई तरह के कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें शामिल होना आम है। दाल-चावल के साथ रोटी, पूरी के साथ आलू की सब्जी, राजमा-चावल के साथ रोटी या छोले के साथ भटूरे। ये हमारे रोजमर्रा के पसंदीदा कॉम्बिनेशन हैं। इनमें से कोई एक चीज खाना अपने आप में गलत नहीं है। समस्या तब होती है, जब एक ही मील में जरूरत से ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें एक साथ खाई जाएं। इसे ‘डबल कार्बिंग’ कहते हैं। डेली ज्यादा मात्रा में कार्ब्स (खासकर रिफाइंड कार्ब्स) लेने से सिर्फ कैलोरी नहीं बढ़ती है। इससे वजन बढ़ता है, ब्लड शुगर बढ़ता है, इंसुलिन बढ़ता है और मेटाबॉलिक डिसऑर्डर की संभावना बढ़ती है। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में डबल कार्बिंग की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- अमृता मिश्रा, सीनियर डाइटीशियन, दिल्ली सवाल- डबल कार्बिंग क्या है? जवाब- इसका मतलब ‘एक ही मील में कार्बोहाइड्रेट से भरपूर दो फूड एक साथ खाना’ है, जैसेकि- सवाल- डबल कार्बिंग और सिर्फ ज्यादा कार्बोहाइड्रेट खाने में क्या अंतर है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- डबल कार्बिंग ज्यादा कार्बोहाइड्रेट खाना सवाल- कौन-से कॉमन फूड कॉम्बिनेशन में अनजाने में डबल कार्बिंग हो जाती है? जवाब- रोजमर्रा के खाने में कई बार मेन कोर्स के साथ स्टार्च वाला साइड फूड (जैसे फ्रेंच फ्राइज, आलू या मैश्ड पोटैटो) जोड़ने से अनजाने में डबल कार्बिंग हो जाती है। ग्राफिक में ऐसे फूड कॉम्बिनेशन की लिस्ट देखिए- सवाल- क्या दाल-चावल भी डबल कार्बिंग है? जवाब- यह आमतौर पर डबल कार्बिंग नहीं है। इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- क्या सभी कार्बोहाइड्रेट शरीर पर एक जैसा असर डालते हैं? जवाब- नहीं, सभी कार्बोहाइड्रेट शरीर पर एक जैसा असर नहीं डालते। इसे पॉइंटर्स से समझिए- सिंपल कार्ब्स कॉम्प्लेक्स कार्ब्स हाई GI कार्ब्स लो GI कार्ब्स सवाल- दो कार्बोहाइड्रेट सोर्स एक साथ खाने पर शरीर में क्या होता है? जवाब- शरीर इन कार्ब्स को तोड़कर एनर्जी के लिए इस्तेमाल करता है। लंबे समय तक जरूरत से ज्यादा कार्ब्स खाने से मेटाबॉलिक हेल्थ पर बुरा असर पड़ सकता है। ग्राफिक में इसका असर देखिए- सवाल- डबल कार्बिंग से इंसुलिन ज्यादा क्यों रिलीज होता है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- क्या रोटी और चावल साथ खाने से वजन बढ़ता है? जवाब- नहीं, वजन बढ़ना मुख्य रूप से इस बात पर निर्भर करता है कि दिनभर में जितनी कैलोरी खर्च करते हैं, उसके मुकाबले कितनी कैलोरी ले रहे हैं। दाल, सब्जी और सलाद के साथ सीमित मात्रा में रोटी-चावल खाने से मील बैलेंस्ड रहता है। सवाल- क्या रोज दो कार्बोहाइड्रेट सोर्स एक साथ खाने से टाइप-2 डायबिटीज का रिस्क बढ़ता है? जवाब- यह इस बात पर निर्भर करता है कि किस तरह के कार्बोहाइड्रेट और कितनी मात्रा में खा रहे हैं, जैसेकि– सवाल- किन लोगों के लिए ज्यादा कार्ब वाला मील नुकसानदायक है? जवाब- जिनका मेटाबॉलिज्म पहले से स्लो है, उनके लिए ज्यादा कार्ब्स पचाना मुश्किल हो सकता है। किन्हें ज्यादा रिस्क है, ग्राफिक में देखिए- सवाल- हेल्दी थाली में कार्ब्स, प्रोटीन और सब्जियों का अनुपात क्या होना चाहिए? जवाब- हेल्दी थाली में सब्जियों का हिस्सा सबसे ज्यादा, जबकि प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट का हिस्सा उससे कम रखना चाहिए। ग्राफिक में अनुपात देखिए- सवाल- कार्ब्स के साथ प्रोटीन और फाइबर खाने से क्या फायदा होता है? जवाब- कार्ब्स शरीर को मुख्य रूप से एनर्जी देता है। जबकि प्रोटीन मसल्स और टिश्यू की ग्रोथ व रिपेयर में मदद करता है। वहीं फाइबर पाचन व गट हेल्थ के लिए जरूरी है। सवाल- चावल छोड़ना बेहतर है या उसकी मात्रा कम करना? जवाब- चावल पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं है। इसकी मात्रा अपनी उम्र, फिजिकल एक्टिविटी, कुल डाइट और हेल्थ कंडीशन के अनुसार तय करनी चाहिए। सवाल- रोटी और चावल दोनों खाने हों तो थाली को कैसे बैलेंस करें? जवाब- दोनों की मात्रा कम रखें और बाकी थाली में प्रोटीन, सब्जियां और सलाद शामिल करें। सवाल- डबल कार्बिंग से बचने के लिए खाने में कौन-से बदलाव करें? जवाब- रोज के मील को इस तरह प्लान करें कि अनजाने में कार्ब्स की मात्रा जरूरत से ज्यादा न हो। डबल कार्बिंग से बचने के टिप्स ग्राफिक में देखिए- डबल कार्बिंग से जुड़े सवाल-जवाब सवाल- क्या कभी-कभार डबल कार्बिंग की जा सकती है? जवाब- हां, एक स्वस्थ व्यक्ति कभी-कभार डबल कार्बिंग कर सकता है। सवाल- क्या एक्सरसाइज करने वालों को भी डबल कार्बिंग से बचना चाहिए? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- नाश्ते में डबल कार्बिंग ज्यादा नुकसान करती है या डिनर में? जवाब- डबल कार्बिंग नाश्ते में हो या डिनर में, उसका असर समय से तय नहीं होता। ज्यादा मायने ये रखता है कि किस तरह के कार्ब्स, कितनी मात्रा में और किन फूड्स के साथ खा रहे हैं। सवाल- क्या मिलेट (बाजरा, ज्वार, रागी) के साथ चावल या रोटी खाना भी डबल कार्बिंग माना जाएगा? जवाब- हां, इसमें भी एक ही मील में दो कार्ब सोर्स शामिल होते हैं। हालांकि, मिलेट्स में फाइबर, प्रोटीन और कई माइक्रोन्यूट्रिएंट्स भी मिलते हैं। ऐसे में इन्हें रिफाइंड कार्ब्स के बराबर नहीं माना जाना चाहिए। **************** ग्राफिक्स- अंकुर बंसल ……………………… ये खबर भी पढ़ें… जरूरत की खबर- क्या आपके भोजन में विटामिन-P है:इससे खाना अच्छे से पचता और शरीर में लगता है, फूड में विटामिन-P बढ़ाने के 10 टिप्स न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स ‘विटामिन P’ (प्लेजर) यानी भोजन से मिलने वाली खुशी को भी हेल्दी ईटिंग का अहम हिस्सा मान रहे हैं। साल 2020 में ‘नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन’ में पब्लिश एक रिव्यू में 100 से ज्यादा स्टडीज को एनालाइज किया गया। रिव्यू में शामिल 57% स्टडीज में पाया गया कि जो लोग खाने का आनंद लेते हैं, उनमें हेल्दी ईटिंग की आदतें भी बेहतर होती हैं। पूरी खबर पढ़ें…