शराब दुकानों से आहते तो बंद हो गए लेकिन शराबखोरी बंद नहीं हुई। उल्टा, शराबियों ने अब दुकानों के बाहर की सड़क, फुटपाथ और सीढ़ियों को ही अपने आहते बना लिए हैं।