केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हिंदी दिवस पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि भारत की भाषाई विविधता कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी ताकत है। हर भाषा अपने साथ इतिहास, लोक परंपराएं और अलग दृष्टिकोण लेकर चलती है, जो नई पीढ़ी तक मूल्यों को पहुंचाते हैं। शाह ने कहा कि हिंदी ने देश के अलग-अलग हिस्सों और समुदायों को जोड़ने में संवाद और संपर्क की भाषा के तौर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि हिंदी दूसरी भारतीय भाषाओं की प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि उनके बीच संवाद और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने वाली कड़ी है। गैर-हिंदी भाषी महापुरुषों का योगदान अमित शाह ने हिंदी के विस्तार में गैर-हिंदी भाषी नेताओं के योगदान का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि स्वामी दयानंद सरस्वती की मातृभाषा गुजराती थी, लेकिन उन्होंने ‘सत्यार्थ प्रकाश’ हिंदी में लिखा। महात्मा गांधी ने 1918 में मद्रास में दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा की स्थापना की। उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस का भी जिक्र किया। शाह के मुताबिक, बंगाली भाषी होने के बावजूद नेताजी ने आजाद हिंद फौज में संवाद के लिए हिंदी को अपनाया और ‘जय हिंद’ का नारा दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे महापुरुषों ने हिंदी को देशभर में संपर्क और जनसंवाद की भाषा बनाने में बड़ा योगदान दिया। भाषा समाज की पहचान और स्मृति शाह ने कहा कि भाषा सिर्फ संवाद का माध्यम नहीं है, बल्कि यह किसी समाज की स्मृति और उसकी पहचान को भी संजोए रखती है। उनके मुताबिक, भारत की भाषाई विविधता ही ‘एकता में विविधता’ की भावना को मजबूत करती है। उन्होंने कहा कि जिन महान लोगों की मातृभाषा हिंदी नहीं थी, उन्होंने भी हिंदी को आगे बढ़ाने में योगदान दिया। इनका उदाहरण देश के लिए प्रेरणादायक है। 2029 से पहले UCC लागू करने का दावा अमित शाह ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकारें 2029 से पहले 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करेंगी। उन्होंने यह बात हिंदी दिवस के कार्यक्रम के दौरान कही।