बडगाम के जहूर अहमद दार का दावा है कि उन्होंने 1990 के दशक से कश्मीर के 111 से ज्यादा मंदिरों की देखभाल की। आतंकवाद के दौर में उन्होंने डर के बावजूद मंदिरों की निगरानी की और इसे धार्मिक सद्भाव, इंसानियत और अपनी आस्था से जुड़ा कर्तव्य बताया।