जंगल या खुले मैदानों में घूमते हुए आपने अक्सर देखा होगा कि जंगली जानवर तालाबों, नदियों या किसी भी गड्ढे का ठहरा हुआ गंदा पानी बड़े मजे से पी लेते हैं. हैरान करने वाली बात यह है कि उस दूषित पानी को पीने बाद भी वे बीमार नहीं पड़ते और पूरी तरह स्वस्थ रहते हैं. इसके विपरीत, यदि कोई इंसान वैसा गंदा पानी पी ले, तो वह डायरिया, टाइफाइड या फूड पॉइजनिंग जैसी गंभीर बीमारियों की चपेट में आ जाता है. इसके पीछे कोई जादू नहीं, बल्कि जानवरों के शरीर की एक खास बनावट और उनका आंतरिक सिस्टम काम करता है. पेट का अत्यधिक एसिडिक होनाजंगली जानवरों के गंदा पानी पचा लेने के पीछे सबसे बड़ा कारण उनके पेट में बनने वाला बेहद शक्तिशाली एसिड होता है. मांसाहारी और कई अन्य जंगली जानवरों के पेट में पाया जाने वाला गैस्ट्रिक एसिड इंसानों के मुकाबले कहीं ज्यादा गाढ़ा और तेज होता है. इंसानों के पेट का एसिड जहां हल्का होता है, वहीं जानवरों के पेट का PH लेवल बहुत कम होता है. जब जानवर गंदे पानी के साथ हानिकारक बैक्टीरिया या वायरस निगलते हैं, तो यह शक्तिशाली एसिड उन किटाणुओं को पेट के भीतर ही तुरंत जलाकर नष्ट कर देता है. जिससे दूषित पानी में मौजूद रोगाणु उनके आंतों तक नहीं पहुंच पाते.इम्यून सिस्टम का मजबूत होनाजानवरों की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यून सिस्टम इंसानों की तुलना में बहुत अलग तरीके से काम करता है. इंसानों ने सदियों से साफ-सुथरा और पका हुआ खाना शुरू कर दिया था, जिसके कारण हमारा शरीर साफ माहौल का आदी हो चुका है. दूसरी तरफ, जगंली जानवर जन्म से ही प्रकृति के बीच हर तरह के बैक्टीरिया के संपर्क में रहते हैं. लगातार ऐसे माहौल में रहने की वजह से उनका इम्यून सिस्टम इन रोगाणुओं के खिलाफ विशेष एंचीबॉडीज तैयार कर लेता है. इसे इनेट इम्यूनिटी कहा जाता है, जो उन्हें प्राकृतिक रूप से बीमारियों से लड़ने की जबरदस्त ताकत देती है.यह भी पढ़ें: कम बजट में ज्यादा जगह, ये हैं बेस्ट फोल्डेबल रूम रैक ऑप्शंसइंसानी शरीर क्यों हो गया है कमजोर?अगर इंसानों के इतिहास को देखा जाए तो हजारों साल पहले हमारे पूर्वज भी जंगलों में रहते थे और नदियों-झरनों का पानी ही पीते थे. लेकिन जैसे-जैसे इंसानी सभ्यता का विकास हुआ, हमने पानी को उबालकर, छानकर और फिल्टर करके पीना शुरू कर दिया. आधुनिक तकनीकों जैसे RO वाटर और प्यूरीफायर के इस्तेमाल ने हमें साफ पानी तो दिया, लेकिन इसकी वजह से समय के साथ हमारे शरीर का इम्यून सिस्टम सुरक्षात्मक रूप से सुस्त हो गया. आज हमारा पाचन तंत्र इतना संवेदनशील हो चुका है कि वह पानी में मौजूद जरा से भी नए बैक्टीरिया को पानी सहन नहीं कर पाता और तुरंत पेट खराब हो जाता है. यह भी पढ़ें: इंसानों की लापरवाही से बंदरों में फैला टीबी, अब मंडराया गंभीर खतरा