शव को पानी के बीच से लेकर गुजरना जोखिम भरा था। तेज बहाव और गहराई के कारण बड़ी संख्या में लोग चाहकर भी नदी पार करने की हिम्मत नहीं जुटा सके और आखिरी मिट्टी में शामिल होने से महरूम रह गए।