चुनाव आयोग ने शनिवार को बैठक के बाद अपने कामकाज से जुड़े कई नियमों में बदलाव किए है। आयोग की बैठक में 9 फैसले लिए गए। इनमें वोटरों की सुनवाई, IT सिस्टम, अधिकारियों की विदेश यात्रा और आयोग की बैठकों की प्रक्रिया से जुड़े बदलाव शामिल हैं। अंदरूनी मतभेद के दावों के बीच आयोग की बैठक में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार, दोनों निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी मौजूद रहे। आयोग ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े फैसले सर्वसम्मत से हुए थे। 1. आयोग की बैठक का रिकॉर्ड बनेगा अब आयोग की बैठक से पहले सभी सदस्यों को एजेंडा दिया जाएगा। बैठक में हुई चर्चा और लिए गए फैसलों का रिकॉर्ड भी तैयार किया जाएगा। 2. विदेश जाने से पहले मंजूरी जरूरी चुनाव आयोग के अधिकारियों को विदेश यात्रा से पहले आयोग की अनुमति लेनी होगी। इसका मकसद अधिकारियों के विदेश दौरों को लेकर प्रक्रिया स्पष्ट करना है। 3. नए IT सिस्टम की पहले जांच होगी नया IT मॉड्यूल या पोर्टल सीधे लागू नहीं किया जाएगा। पहले अधिकारियों की कमेटी इसकी जांच करेगी। इसके बाद ही इसे आयोग के सामने मंजूरी के लिए रखा जाएगा। 4. ECINet की समीक्षा के लिए कमेटी ECINet सिस्टम की समीक्षा के लिए वरिष्ठ डिप्टी चुनाव आयुक्त की अध्यक्षता में कमेटी बनाई जाएगी। इसमें IIT या IIIT के एक स्वतंत्र विशेषज्ञ को भी शामिल किया जाएगा। 5. फील्ड अधिकारियों को जरूरत के मुताबिक एक्सेस चुनावी काम में लगे फील्ड अधिकारियों को सिस्टम पर जरूरत के हिसाब से अतिरिक्त सुविधा या एक्सेस देने की बात कही गई है। 6. आयुक्तों के निर्देशों का पालन जरूरी आयोग ने अधिकारियों को चुनाव आयुक्तों की ओर से दिए गए निर्देशों का पालन करने को कहा है। गोवा के 97 मतदाताओं का मामला गोवा में 97 ऐसे मतदाता थे, जिनके नाम स्थानीय अधिकारियों ने मंजूर किए थे, लेकिन अंतिम वोटर लिस्ट में शामिल नहीं हुए। आयोग के मुताबिक, इनमें से 81 लोगों ने Form 6 भर दिया है। इन सवालों पर अभी स्थिति साफ नहीं नए फैसलों के बावजूद ऑनलाइन Form 6 में माता-पिता से जुड़ा सवाल क्यों जोड़ा गया, यह स्पष्ट नहीं किया गया है। यह भी नहीं बताया गया कि इसे किसने जोड़ा और क्या अब इसे हटाया गया है। पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट से जुड़े करीब 16 लाख नामों के खिलाफ अपील किसके आदेश पर दाखिल हुई, इस सवाल का भी स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है। इसके अलावा, गोवा में मतदाता का नाम बहाल करने वाला सॉफ्टवेयर फीचर क्यों शुरू नहीं हुआ और IT विभाग के कुछ अधिकारियों को लेकर उठे सवालों पर क्या कार्रवाई हुई, इसकी जानकारी भी नए फैसलों में नहीं है।