दिल्ली में स्ट्रीट लाइट व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए पीडब्ल्यूडी ने दिवाली तक 20 हजार पुरानी और खराब लाइटों को स्मार्ट एलईडी से बदलने का लक्ष्य रखा है। जनवरी 2027 तक कुल 1 लाख पुरानी स्ट्रीट लाइटों को स्मार्ट लाइट में बदलने की योजना है। पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने गुरुवार को बताया कि नई व्यवस्था में स्ट्रीट लाइटों की रियल टाइम निगरानी होगी। इसके लिए पीडब्ल्यूडी मुख्यालय में सेंट्रलाइज्ड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर बनाया जाएगा। कंट्रोल सेंटर से हर लाइट की स्थिति पर नजर रखी जा सकेगी। लाइट खराब होने पर इसकी जानकारी तुरंत मिल जाएगी और जरूरत के मुताबिक उसे दूर से नियंत्रित भी किया जा सकेगा। इससे खराब लाइट की जानकारी के लिए नागरिकों की शिकायत का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और मरम्मत की प्रक्रिया तेज होगी। हर साल 30 करोड़ रुपए बिजली-रखरखाव में बचेंगे अधिकारियों के मुताबिक, पुरानी सोडियम लाइटों की जगह ऊर्जा दक्ष स्मार्ट एलईडी लगाने से बिजली और रखरखाव के खर्च में हर साल करीब 30 करोड़ रुपए की बचत होने का अनुमान है। परियोजना की अनुमानित लागत 473 करोड़ रुपए है। इसमें पांच साल का ऑपरेशन और मेंटेनेंस भी शामिल है। परियोजना में निजी कंपनी को भुगतान प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा। लाइट पूरी तरह चालू और कार्यशील होने पर ही मासिक भुगतान किया जाएगा। कंपनी की जिम्मेदारी लाइट लगाने के साथ उसके संचालन, रखरखाव और समय पर मरम्मत की भी होगी। सड़क और महिलाओं की सुरक्षा पर भी जोर मंत्री ने कहा कि बेहतर स्ट्रीट लाइट व्यवस्था का सीधा संबंध सड़क और महिलाओं की सुरक्षा से है। अंधेरे वाले स्थानों पर पर्याप्त रोशनी उपलब्ध कराने में स्मार्ट लाइट परियोजना मददगार होगी। चरणबद्ध तरीके से 1 लाख लाइटें बदलने से व्यवस्था अधिक आधुनिक और जवाबदेह बनेगी।