मथुरा जैसे धार्मिक और पर्यटन स्थल पर घूमने आने वाले लोगों और स्थानीय निवासियों की लापरवाही अब जानवरों के लिए भी खतरा बनती जा रही है. टीबी से पीड़ित मरीजों द्वारा खुले में फेंके गए झूठे भोजन, फल और अन्य दूषित चीजों के संपर्क में आने से बंदरों में भी टीबी की बीमारी तेजी से फैल रही है. भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों के शोध में इस बात की पुष्टि हुई है, जिसने पूरे इलाके में स्वास्थ्य से जुड़ी नई चिंता खड़ी कर दी है.भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने मथुरा में करीब 150 से ज्यादा संदिग्ध बंदरों के ब्लड, थूक और फेफड़ों के नमूने इकट्ठा किए. इसके अलावा मृत बंदरों के पोस्टमॉर्टम में उनके फेफड़ों के भीतर माइक्रोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस बैक्टीरिया की मौजूदगी गंभीर स्तर पर पाई गई, जिससे यह साफ हो गया कि दूषित भोजन के जरिए बंदरों में भी टीबी का संक्रमण फैल रहा है.इंसान से जानवर तक कैसे पहुंची बीमारी?एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह पूरा मामला रिवर्स जूनोसिस का उदाहरण है, यानी आमतौर पर बीमारियां जानवरों से इंसानों में फैलती हैं, लेकिन इस मामले में उल्टा हो रहा है और इंसानों से यह बीमारी बंदरों में स्थानांतरित हो रही है. पीड़ित मरीजों के छोड़े गए दूषित भोजन और फलों को जब बंदर खाते हैं, तो वे भी इस संक्रमण की चपेट में आ जाते हैं. इसके अलावा संक्रमित इंसानों के मल-मूत्र के संपर्क में आने और काटने की घटनाओं से भी यह बीमारी फैलने की आशंका जताई गई है. लगातार बढ़ रहे हैं मरीजों के आंकड़ेस्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में टीबी संक्रमण के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. 2023 में यह संख्या 17,302 थी, जो 2024 में बढ़कर 18,106 तक पहुंच गई. 2025 में यह आंकड़ा घटकर 17,759 पर आया, लेकिन 2026 में सिर्फ जनवरी से 21 अगस्त के बीच ही 10,344 नए टीबी संक्रमित मरीज दर्ज किए जा चुके हैं, जो चिंता की बात है.यह भी पढ़ें: क्या शराब पीने के बाद दवाएं खा सकते हैं, क्या कहते हैं डॉक्टर्स?कुपोषण और भूख भी बन रही वजहवैज्ञानिकों के मुताबिक जो बंदर टीबी की चपेट में आ चुके हैं, वे भी अब खुद इंसानों तक इस बीमारी को दोबारा फैलाने का जरिया बन सकते हैं, जिससे संक्रमण का एक चक्र बन जाता है. इसके अलावा पोषण की कमी से जूझ रहे बंदर भूख की वजह से उग्र होकर लोगों पर हमला करने लगे हैं, जिससे इंसानों में संक्रमण फैलने का खतरा और बढ़ जाता है. संक्रमित बंदरों के खुले टैंकों का पानी पीने या उनके संपर्क में आने से भी इंसानों में दोबारा टीबी संक्रमण का यह चक्र शुरू हो सकता है.बचाव के लिए क्या दी गई सलाह?वेटरनरी यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ डॉ. मुकेश श्रीवास्तव के मुताबिक बंदरों को खाना खिलाते समय भी अगर वे फेफड़ों की टीबी से पीड़ित हों, तो इंसानों में भी यह बीमारी फैलने का खतरा बना रहता है. इसलिए संक्रमित बंदरों से बचकर रहने की सलाह दी गई है. मामले की गंभीरता को देखते हुए दुवास मथुरा के वेटरनरी हॉस्पिटल, केजीएमयू और भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली के वैज्ञानिकों की टीम अब संवेदनशील इलाकों में सैंपल कलेक्शन का काम कर रही है, ताकि इस बीमारी के फैलाव को रोका जा सके. स्वास्थ्य विभाग ने भी दिसंबर के अंत तक संक्रमण के आंकड़ों पर करीबी नजर रखने की बात कही है.यह भी पढ़ें: ₹2700 की कैंसर दवा ₹27000 में! सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी