मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने याचिका निरस्त करते हुए कहा कि कोर्ट विशेषज्ञ चयन समिति की जगह बैठकर अभ्यर्थियों की योग्यता का तुलनात्मक मूल्यांकन नहीं कर सकती।