सिविल मामलों की सुनवाई के दौरान फर्जी दस्तावेज या गंभीर जालसाजी सामने आने पर सिविल कोर्ट, पुलिस को एफआइआर दर्ज कर जांच के आदेश दे सकते हैं। इसके लिए अलग से लिखित शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया अपनाना अनिवार्य नहीं है।