इस दौरान जिस तिथि पर परिजनों का निधन होता है उस तिथि पर उनकी स्मृति में ब्राह्मण भोज कराया जाता है तथा यथाशक्ति दक्षिणा दी जाती है। इसे श्राद्ध कहा जाता है। इस अवधि में शुभ कार्य वर्जित रहते हैं तथा किसी प्रकार की नई वस्तुएं नहीं खरीदी जाती हैं।