बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण पर खुद नोटिस लेते हुए सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि वह किसी धर्म या त्योहार के खिलाफ नहीं है। चिंता केवल त्योहारों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में होने वाले शोर को लेकर है। जस्टिस जीएस कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की बेंच ने डीजे, साउंड सिस्टम और लाउडस्पीकर से होने वाले शोर पर चिंता जताई। बेंच ने मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को तय की है। हाईकोर्ट ने राज्य के एडवोकेट जनरल मिलिंद साठे को ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों की जानकारी देने का निर्देश दिया। यह भी बताने को कहा कि मूर्ति विसर्जन जुलूसों के दौरान इन नियमों का पालन हो रहा है या नहीं। नियमों के पालन पर मांगी जानकारी हाईकोर्ट ने पूछा कि ध्वनि प्रदूषण को लेकर तय नियमों का पालन किस तरह किया जा रहा है। अदालत ने यह जानकारी भी मांगी कि तय शोर स्तर को लेकर दिशानिर्देश बनाए गए हैं या नहीं। साथ ही, इन दिशानिर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है या नहीं। हाईकोर्ट ने कानून तोड़ने वालों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई की जानकारी भी मांगी है।