सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन (CTA) ने सोनम वांगचुक के उस बयान पर आपत्ति जताई, जिसमें वांगचुक ने लद्दाख के हालात की तुलना तिब्बत से की थी। CTA के प्रवक्ता तेनजिन लेकशे ने कहा कि यह तुलना गलत और हकीकत से परे है। वांगचुक का बयान चीन के सत्तावादी शासन में तिब्बतियों की स्थिति नहीं दिखाता। वांगचुक ने लेह में 24 सितंबर 2025 में हुई हिंसा की पहली बरसी पर एक कार्यक्रम में यह टिप्पणी की थी। इस हिंसा में चार लोगों की मौत हुई थी। कार्यक्रम लद्दाख बौद्ध एसोसिएशन ने आयोजित किया था। इसमें वांगचुक ने 2019 से लद्दाख को लेकर केंद्र सरकार के रवैये की आलोचना की। वांगचुक ने क्या कहा था वांगचुक ने कहा था, “लद्दाख की एक तरफ चीन और दूसरी तरफ भारत था। लद्दाख ने भारत को चुना, क्योंकि हमें लगा कि लोकतंत्र वाले भारत में हम सिर उठाकर रह सकेंगे।” उन्होंने कहा था, “लेकिन आज लद्दाख पर ऐसा उत्पीड़न किया जा रहा है, जो मेरे विचार से चीन भी तिब्बत पर नहीं कर रहा है।” CTA ने तुलना को गलत बताया तिब्बती निर्वासित सरकार CTA ने अब लद्दाख और तिब्बत की स्थिति की तुलना पर गहरी चिंता जताई है। तिब्बती सरकार के आधिकारिक प्रवक्ता तेनजिन लेकशे ने बयान में कहा, “CTA इस तुलना को गलत और वास्तविकता से परे मानता है। उनका बयान तिब्बत की वास्तविक स्थिति को नहीं दिखाता।” लेकशे ने कहा कि तिब्बत अब भी चीन के सत्तावादी शासन के अधीन है। वहां तिब्बतियों को उनके मूल अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता के दमन का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि तिब्बत की अलग सांस्कृतिक पहचान मिटाने के उद्देश्य से उठाए जा रहे कदम भी लगातार तेज किए जा रहे हैं।