Google Maps दुनिया के सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले मैपिंग प्लेटफॉर्म में से एक है. लोग इसका इस्तेमाल रास्ता खोजने, किसी जगह की लोकेशन देखने और आसपास की दुकानों या सड़कों की जानकारी हासिल करने के लिए करते हैं. लेकिन इसकी जानकारी हमेशा सरकारी रिकॉर्ड जैसी स्थायी या आफिशियल नहीं होती. यूजर्स और दूसरे सोर्सज से मिलने वाले डेटा के कारण कभी-कभी इसमें अजीबोगरीब बदलाव भी दिखाई दे सकते हैं.ऐसी ही एक दिलचस्प घटना में एक शख्स ने Google Maps की इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर एक सड़क का नाम अपने नाम से जोड़ दिया. यह मामला इसलिए चर्चा में आया क्योंकि देखने वालों को मैप पर सड़क का नाम बाकायदा असली जानकारी जैसा नजर आ रहा था.ऐसे किया Google Maps को गुमराहमीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस शख्स ने Google Maps के यूजर-एडिटिंग सिस्टम का फायदा उठाया. Google Maps में यूजर्स किसी जगह या लोकेशन से जुड़ी गलत जानकारी की रिपोर्ट कर सकते हैं और कुछ मामलों में नई जगह या जानकारी जोड़ने का सुझाव भी दे सकते हैं.इसी प्रोसेस का इस्तेमाल करते हुए सड़क के नाम में बदलाव कराया गया. खास बात यह थी कि मैप पर दिखाई देने वाली जानकारी देखने में इतनी नॉर्मल लग रही थी कि पहली नजर में किसी को शक नहीं हुआ कि इसके पीछे किसी व्यक्ति की शरारत हो सकती है.यह भी पढ़ें: Google Maps और Earth में क्या है फर्क? जानें क्या है दोनों की टेक्नोलॉजीइस तरह शख्स ने टेक्निकल सिस्टम की एक खामी या वेरिफिकेशन प्रोसेस का फायदा उठाकर सड़क को अपने नाम से जोड़ने में कामयाबी हासिल की.Google Maps की जानकारी कौन बदल सकता है?आपको बता दें कि Google Maps को सिर्फ Google की टीम ही अपडेट नहीं करती है. प्लेटफॉर्म पर यूजर्स भी किसी जगह से संबंधित गलत जानकारी की शिकायत कर सकते हैं या बदलाव का सुझाव दे सकते हैं. ऐसे सुझावों को Google अपने सिस्टम और उपलब्ध जानकारी के आधार पर चेक करता है.यही क्राउडसोर्सिंग सिस्टम Google Maps को दुनिया भर में तेजी से अपडेट रखने में मदद करता है. हालांकि, इसका दूसरा पहलू यह है कि गलत या मजाकिया जानकारी भी कभी-कभी सिस्टम तक पहुंच सकती है.इस मामले से यह समझ आता है कि किसी मैप पर दिखाई देने वाली जानकारी को हमेशा सरकारी रिकॉर्ड या ऑफिशियल डॉक्यूमेंट्स नहीं माना जाना चाहिए.मैप पर दिखी जानकारी हमेशा सच नहीं होतीGoogle Maps में किसी सड़क, दुकान या जगह का नाम दिखाई देने का मतलब यह जरूरी नहीं कि वह नाम स्थानीय प्रशासन के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी दर्ज हो. खासकर यूजर द्वारा सुझाई गई जानकारी के मामले में ऐसा संभव है कि उसे बाद में संशोधित या हटा दिया जाए.इस तरह की घटनाएं यह भी दिखाती हैं कि डिजिटल मैपिंग सर्विसेज में ऑटोमेशन और यूजर इनपुट के साथ वेरिफिकेशन कितना जरूरी है. एक छोटी सी गलत जानकारी भी हजारों या लाखों यूजर्स तक पहुंच सकती है.यह भी पढ़ें:AI बना रहा धड़ाधड़ सॉफ्टवेयर, फिर भी इस्तेमाल क्यों नहीं कर रहीं कंपनियां? ये है वजह