बाजार में सामान खरीदते वक्त हम में से ज्यादातर लोग पैकेट के आगे लिखी बातों पर भरोसा कर लेते हैं. 100 परसेंट नेचुरल, नो ऐडेड शुगर, हार्ट हेल्दी, ऑर्गेनिक. इन शब्द देखकर लगता है कि हम सेहत के लिए सही चीज उठा रहे हैं लेकिन इन्हीं प्रोडक्ट के पीछे लिखी सामग्री पढ़िए तो कई बार पूरी कहानी कुछ और निकलती है.देश के फूड रेगुलेटर FSSAI ने हाल ही में बहुत से फूड ब्रांड्स को नोटिस भेजे हैं. हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यही है कि नियम पहले से हैं चेतावनी भी जारी हो चुकी है फिर भी ऐसी चीजें दुकानों और ऐप्स पर इतनी आसानी से कैसे बिक रही हैं?पैकेट के आगे का दावा पीछे की सच्चाईजून 2026 में FSSAI ने एक साथ कई कंपनियों को नोटिस थमाए. शिकायत लगभग एक जैसी थी. एक मैंगो जूस पर लिखा था नो ऐडेड शुगर लेकिन सामग्री में निकला 51% मैंगो पल्प और 39% गन्ने का रस यानी मिठास गन्ने के रस से आ रही है. एक नूडल्स ब्रांड खुद को सौ परसेंट नेचुरल और ऑर्गेनिक आटे से बना बता रहा था पर अंदर निकला सादा मैदा. एक टोफू प्रोडक्ट पर कैंसर रोधी गुण जैसे दावे थे जो बिना मेडिकल मंजूरी लिखे ही नहीं जा सकते.एक कुकिंग ऑयल पर हार्ट प्रो शब्द और दिल की तस्वीरें इस तरह थीं कि ग्राहक को लगे यह तेल सीधे दिल की सेहत सुधार देगा.यह है कानूनी चुनौतीफूड कानून में यानी FSS एक्ट और एडवरटाइजिंग एंड क्लेम्स रेगुलेशन में 100 परसेंट शब्द की कोई परिभाषा ही नहीं है. मतलब यह कि जब कंपनी हंड्रेड परसेंट लिखती है तो वो किस चीज का हंड्रेड परसेंट है (शुद्धता का, फल का, नेचुरल होने का) यह कहीं साफ ही नहीं होता और जो बात साफ नहीं उसका दावा आप कर ही नहीं सकते.बच्चों के चहेते Kinder Joy पर भी उठे सवालबच्चों का चहेता Kinder Joy. इसके पैकेट के आगे लिखा है 'रिच इन मिल्क सॉलिड्स' यानी दूध से भरपूर. मां-बाप यही पढ़कर सोचते हैं, चलो थोड़ा दूध तो जाएगा बच्चे के पेट में, लेकिन फिर वही पैकेट पलटिए. मिलेगा शुगर और फैट और दूध वाला हिस्सा बहुत नीचे, बहुत कम. इसमें भी लिस्ट का नियम यह है कि जो चीज सबसे ज्यादा हो, वो सबसे पहले लिखी जाती है. FSSAI ने ठीक इसी पर उंगली रखी है और कहा है कि जब दूध मुख्य चीज है ही नहीं, तो उसे भरपूर बता देना ग्राहक को गुमराह करना है.FSSAI has issued notices to several food business operators (FBOs) for violating provisions of the FSS Act, 2006 regarding misleading brand names, trade names, and product claims, labelling violations and other consumer complaints. FBOs are directed to take corrective measures. pic.twitter.com/QSb1UNZ3Gm— FSSAI (@fssaiindia) June 19, 2026एक साल पहले ही आ चुकी थी साफ चेतावनीयह पहली बार नहीं हो रहा. FSSAI 28 मई 2025 को एक आधिकारिक एडवाइजरी जारी कर चुका है जिस पर रेगुलेटरी कंप्लायंस के डायरेक्टर के दस्तखत हैं. इस चिट्ठी में रेगुलेटर ने साफ कहा कि फूड पैकेट और विज्ञापनों पर सौ परसेंट शब्द का चलन तेजी से बढ़ा है और यह शब्द भ्रामक है. FSSAI कहती है कि चाहे अकेले लिखा हो या किसी और शब्द के साथ, सौ परसेंट लिखने से ग्राहक के मन में पूरी शुद्धता और दूसरों से बेहतर होने का गलत भरोसा बनता है. इसी आधार पर सभी कंपनियों को निर्देश दिया गया कि वे लेबल, पैकेजिंग और प्रमोशन से यह शब्द हटा दें.निर्देश के बाद भी नहीं बदली बाजार की तस्वीरचेतावनी के एक साल बाद भी हालात ज्यादा नहीं बदले. एक पड़ताल में सामने आया कि रेगुलेटर ने अलग अलग समय पर 160 से ज्यादा भ्रामक दावों को चिह्नित किया, जिनमें सबसे पुराना मामला 2022 का था लेकिन इनमें से करीब 120 प्रोडक्ट आज भी उन्हीं दावों के साथ बिक रहे हैं, जिन्हें गलत बताया जा चुका था यानी आपत्ति दर्ज होने के बाद भी पैकेजिंग वैसी की वैसी बनी रही. यहां तक कि सरकार के अपने आर्थिक सर्वेक्षण 2026 में भी माना गया कि भ्रामक फूड विज्ञापनों के खिलाफ नियम तो बहुत हैं पर उन पर अमल बहुत कमजोर है. हालांकि कंपनियों का अपना पक्ष भी है. उनका कहना रहा है कि उसके मामले नियमों के पूरे पालन के साथ बंद किए जा चुके हैं. एक कुकिंग ऑयल कंपनी ने भी कहा है कि उसके दावे कानून के मुताबिक और वैज्ञानिक आधार पर सही हैं और वह रेगुलेटर को विस्तार से जवाब दे रही है.ग्राहक के पास क्या अधिकार है?FSS एक्ट 2006 के तहत कोई भी कंपनी अपने फायदे के लिए ग्राहक को गुमराह नहीं कर सकती. अगर पैकेट के आगे कुछ और लिखा है और अंदर सामग्री में कुछ और निकलता है तो यह उल्लंघन है और इसकी शिकायत की जा सकती है. उल्लंघन साबित होने पर कंपनी पर भारी जुर्माने और गंभीर मामलों में लाइसेंस रद्द करने तक का प्रावधान है. इसलिए आदत डालिए, पैकेट के आगे के बड़े बड़े दावों के साथ पीछे लिखी सामग्री की सूची जरूर पढ़िए. सौ परसेंट, नेचुरल, प्योर और हेल्दी जैसे शब्दों को आंख मूंदकर सच मत मानिए.यह भी पढ़ें: युवाओं में तेजी से बढ़ रहा ओरल कैंसर का खतरा, तंबाकू-वेपिंग बन रहे जानलेवा, जानें लक्षण