30 जून 1857 को इंदौर में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह की चेतावनी को कर्नल ड्युडरनेक ने नजरअंदाज कर दिया। 1 जुलाई की सुबह होलकर सेना ने रेसीडेंसी पर तोपों से हमला बोल दिया।