जब हम विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के समग्र विकास और उनकी थेरेपी की बात करते हैं, तो अक्सर हमारा पूरा ध्यान उनके मानसिक, भाषाई या संज्ञानात्मक विकास पर ही केंद्रित हो जाता है। हमें इस बुनियादी वैज्ञानिक सत्य को गहराई से समझना होगा कि मानव शरीर और मस्तिष्क दो अलग-अलग हिस्से नहीं हैं, बल्कि वे एक अटूट तंत्र के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।