ज्येष्ठ पूर्णिमा के इस पावक दिन पर भगवान जगन्नाथ, उनके अग्रज भ्राता बलभद्र, बहन सुभद्रा और सुदर्शन चक्र को 108 दिव्य कलशों के सुगंधित जल से महास्नान कराया गया।