वक्ताओं ने राजर्षि शाहूजी महाराज के सामाजिक न्याय आधारित विचारों "जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी और जिसकी जितनी हिस्सेदारी, उसकी उतनी भागीदारी" को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।