आरोपित स्वयं को नगर निगम राजनांदगांव का कर्मचारी बताकर लोगों का विश्वास जीतता था और अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों से करीबी संबंध होने का दावा कर ठगी की वारदात को अंजाम देता था।