किताब: शिव से श्रोडिंगर तक (अंग्रेजी किताब 'शिवा टू श्रोडिंगर' का हिंदी अनुवाद) लेखक: डॉ. मृत्युंजय गुहा मजूमदार अनुवाद: शैलेंद्र गौतम प्रकाशक: पेंगुइन मूल्य: 399 रुपए दर्शन यानी फिलॉसफी और विज्ञान दो अलग चीजें मानी जाती हैं, लेकिन दोनों की मंजिल एक ही है- सत्य की खोज। इंडियन फिलॉसफी चेतना, अस्तित्व और ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने की कोशिश करती है। वहीं ‘क्वांटम फिजिक्स’ उन्हीं सवालों के जवाब वैज्ञानिक नजरिए से तलाशती है। डॉ. मृत्युंजय गुहा मजूमदार ने अपनी किताब ‘शिव से श्रोडिंगर तक' में यही समझाने की कोशिश की है। इसमें ‘त्रिक शैववाद’ के गहरे विचारों और क्वांटम फिजिक्स के कॉन्सेप्ट्स के बीच संबंध तलाशे गए हैं। त्रिक शैववाद एक प्राचीन भारतीय दर्शन है। जो लोग ब्रह्मांड, चेतना और अपने अस्तित्व से जुड़े सवालों को समझना चाहते हैं, उनके लिए यह किताब दिलचस्प हो सकती है। किताब किस बारे में है? ये किताब एक बौद्धिक (इंटेलेक्चुअल) और आध्यात्मिक (स्पिरिचुअल) यात्रा है। इसमें कश्मीर के त्रिक शैववाद की गहरी बातों को क्वांटम फिजिक्स की नई डिस्कवरी से जोड़कर बताया गया है। लेखक डॉ. मृत्युंजय गुहा मजूमदार वैज्ञानिक और दार्शनिक दोनों हैं। वे लिखते हैं कि प्राचीन भारतीय दर्शन ने उन सिद्धांतों को पहले ही समझ लिया था, जिन्हें आज वैज्ञानिक अपनी रिसर्च में खोज रहे हैं। यह किताब बताती है कि ब्रह्मांड की हर चीज (आप, मैं, तारे और ग्रह) एक ही ढंग से काम कर रहे हैं। त्रिक शैववाद- एक प्राचीन दर्शन इस किताब का दार्शनिक आधार कश्मीर शैववाद है। इसे ‘त्रिक शैववाद’ भी कहते हैं। यह दर्शन कहता है कि पूरा ब्रह्मांड ‘परमशिव की चेतना’ से बना है। परमशिव यानी वह सर्वोच्च चेतना, जो सबकुछ है। इस दर्शन में तीन मुख्य सिद्धांत हैं- ये तीनों मिलकर कंपन करते हैं, जिसे लेखक ‘स्पंदन’ कहते हैं। यह कंपन ही ब्रह्मांड को बनाता और खत्म करता है। यह विचार क्वांटम फिजिक्स के उस सिद्धांत से मिलता है, जिसमें कहा जाता है कि ब्रह्मांड में हर कण एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। त्रिक शैववाद के मुख्य सिद्धांत ग्राफिक में देखिए- दुनिया की हर चीज का आपस में कनेक्शन क्वांटम फिजिक्स ने विज्ञान की दुनिया को बदल दिया है। इसके मुताबिक, ब्रह्मांड उतना सरल नहीं है, जितना हम सोचते हैं। क्वांटम एंटेंगलमेंट के मुताबिक, दो कण, चाहे कितनी भी दूरी पर हों, एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं। अगर एक कण में बदलाव होता है, तो दूसरा भी बदलता है। यह ठीक वैसा ही है, जैसे त्रिक शैववाद में कहा जाता है कि सब कुछ एक ही चेतना से जुड़ा है। किताब क्या सिखाती है? यह किताब सिर्फ सिद्धांतों की बात नहीं करती, बल्कि यह जीवन जीने का सही रास्ता भी दिखाती है। इस किताब में 7 बड़े सबक दिए गए हैं, जो आपके सोचने के तरीके को बदल सकते हैं। इन्हें ग्राफिक में देखिए- अब सभी पॉइंट्स विस्तार से समझिए- सब कुछ एक ही है त्रिक शैववाद अद्वैत की बात करता है यानी सब कुछ एक है। आप और मैं, पेड़ और पहाड़, सब एक ही चेतना का हिस्सा हैं। इसे समझने के लिए रोज 10 मिनट ध्यान करें और अपने भीतर की शांति को महसूस करें। स्पंदन का अनुभव करें ब्रह्मांड का हर कण कंपन कर रहा है। अपनी सांस पर ध्यान दें और इस कंपन को महसूस करें। यह आपको ब्रह्मांड से जोड़ेगा। अज्ञान से बाहर निकलें अविद्या यानी अज्ञान, जो हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि हम सब अलग हैं। किताब सिखाती है कि इस भ्रम को तोड़ने के लिए आत्म-चिंतन करें। अध्यात्मिक ऊर्जा का महत्व त्रिक शैववाद में गुरु द्वारा दी गई आध्यात्मिक ऊर्जा (शक्तिपात) आपको जागृत कर सकती है। इसके लिए किसी अनुभवी गुरु की तलाश करें। क्वांटम नजरिया अपनाएं क्वांटम फिजिक्स कहता है कि हमारा दृष्टिकोण ही तय करता है कि कोई चीज हमें कैसी लगेगी या दिखेगी। अपने विचारों को सकारात्मक रखें और दुनिया को नए तरीके से देखें। ध्यान और मंत्र रोजाना मंत्र जाप और ध्यान करें। यह ब्रेन को शांत करेगा और आपको गहरे सत्य के करीब ले जाएगा। जीवन को एक नृत्य समझें त्रिक शैववाद कहता है कि जीवन एक नृत्य है, जिसमें शिव और शक्ति साथ मिलकर सृष्टि बनाते हैं। हर पल को इस नृत्य का हिस्सा मानें और आनंद लें। किताब क्यों है खास? ये किताब दो अलग-अलग दुनिया- आध्यात्मिकता और विज्ञान को एक साथ लाती है। किताब में वैज्ञानिक सिद्धांतों को उदाहरणों और कहानियों के साथ समझाया गया है। इससे जटिल बातें भी आसान लगती हैं। उदाहरण के लिए, लेखक ने एक कहानी बताई है, जिसमें एक वैज्ञानिक अपनी प्रयोगशाला में क्वांटम एंटेंगलमेंट को देखकर हैरान हो जाता है। वह सोचता है कि यह तो वही है, जो त्रिक शैववाद में हजारों साल पहले कहा गया था। ऐसी कहानियां किताब को जीवंत बनाती हैं। त्रिक शैववाद दूसरे भारतीय दर्शनों से कैसे अलग? किताब में ‘त्रिक शैववाद’ और अन्य भारतीय दर्शनों के बीच तुलना की गई है। जैसे अद्वैत वेदांत कहता है कि दुनिया माया (भ्रम) है, वहीं त्रिक शैववाद कहता है कि दुनिया शिव की चेतना का असली रूप है। त्रिक शैववाद का विचार क्वांटम फिजिक्स से ज्यादा मेल खाता है, जो कहता है कि ब्रह्मांड की हर चीज वास्तविक है और जुड़ी हुई है। किन्हें पढ़नी चाहिए ये किताब? जो दर्शन और विज्ञान में रुचि रखते हैं, उन्हें यह किताब पसंद आएगी। यह किताब दुनिया को अधिक गहराई से समझने का मौका देती है। ग्राफिक में देखिए, किताब किन्हें पढ़नी चाहिए- किताब की कमियां किताब प्रेरणादायक है, लेकिन कुछ जगहों पर यह थोड़ी जटिल हो जाती है। अगर क्वांटम फिजिक्स और भारतीय दर्शन में आपकी रुचि नहीं है तो ये किताब बोझिल लग सकती है। अगर लेखक सरल उदाहरण या कहानियां जोड़ते, तो इसे ज्यादा लोग समझ पाते। साथ ही किताब में त्रिक शैववाद और क्वांटम फिजिक्स में समानता पर ज्यादा ध्यान है। लेकिन यह नहीं बताया गया है कि इनमें क्या फर्क हैं। किताब के बारे में मेरी राय ‘शिव से श्रोडिंगर तक’ किताब यह सोचने पर मजबूर करती है कि शायद प्राचीन ऋषि और आधुनिक वैज्ञानिक एक ही सत्य की बात कर रहे हैं। अगर आप अपने जीवन में गहरे सवालों के जवाब ढूंढ रहे हैं, तो यह किताब आपके लिए है। यह ब्रह्मांड को समझने के साथ भीतर शांति भी जगाती है। इसे पढ़ें और खुद को उस अनंत चेतना का हिस्सा महसूस करें, जो शिव से लेकर श्रोडिंगर तक फैली हुई है। ………………ये खबर भी पढ़िएबुक रिव्यू- भाग्य हमारा जीवन नहीं बनाता:हम खुद बनाते हैं अपनी मेहनत से, ये किताब पढ़ें और जिंदगी की कमान अपने हाथों में लें 'ध्रुव' गौरांग दर्शन दास की लिखी एक सेल्फ-हेल्प बुक है। लेखक, शिक्षक और संन्यासी हैं, उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc), बेंगलुरु से मास्टर डिग्री हासिल की है। वे ‘इस्कॉन (ISKCON) गोवर्धन इकोविलेज’ में भक्तिवेदांत विद्यापीठ के डीन हैं। आगे पढ़िए...