पिछले पांच सालों से हाउसिंग बोर्ड ने आम जनता के लिए एक भी नया बजट-फ्रेंडली या किफायती प्रोजेक्ट लान्च नहीं किया है। शहर का एक बड़ा मध्यम और गरीब वर्ग अब प्राइवेट बिल्डरों या फिर नगर निगम की प्रधानमंत्री आवास योजना के भरोसे रहने को मजबूर है।