Eggs vs Soybeans : पश्चिम बंगाल में सरकार के एक फैसले के बाद मिड-डे मील को लेकर बड़ी बहस शुरू हो गई है. सरकार ने इस योजना के संचालन की जिम्मेदारी इस्कॉन से जुड़ी अन्नामित्र फाउंडेशन को सौंपने का फैसला किया है. इसके बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठने लगा कि अगर बच्चों की थाली से अंडे हटा दिए जाएं और उनकी जगह सोया से बने फूड आइटम्स दिए जाएं, तो क्या बच्चों को उतना ही पोषण मिल पाएगा.इस विवाद के पीछे बच्चों के पोषण, उनकी बढ़ती उम्र की जरूरतें, सरकारी योजनाओं और खाने की क्वालिटी जैसे कई अहम मुद्दे जुड़े हुए हैं. पश्चिम बंगाल में सरकारी स्कूलों के मिड-डे मील में फिलहाल बच्चों को हफ्ते में एक दिन अंडा दिया जाता है. अंडा लंबे समय से इस योजना का अहम हिस्सा रहा है. यह कम कीमत में अच्छी क्वालिटी वाला प्रोटीन उपलब्ध कराता है. ऐसे में जब इसकी जगह सोया, पनीर या राजमा जैसे ऑप्शनों की बात सामने आई तो बहस तेज हो गई कि आखिर बच्चों के लिए बेहतर ऑप्शन कौन-सा है. तो आइए जानते हैं कि अंडा या सोयाबीन प्रोटीन के मामले में ज्यादा ताकतवर कौन है.सोयाबीन को क्यों माना जाता है अच्छा प्रोटीन सोर्स?सोयाबीन को पौधों से मिलने वाले सबसे अच्छे प्रोटीन सोर्स में गिना जाता है. ज्यादातर वेजीटेरियन प्रोटीन फूड्स के मुकाबले, सोयाबीन में शरीर के लिए जरूरी सभी 9 जरूरी अमीनो एसिड मौजूद होते हैं. इसी वजह से इसे कंप्लीट प्रोटीन कहा जाता है. इस मामले में यह अंडे, दूध और मांस जैसी कैटेगरी में शामिल होता है. सोया चंक्स, टोफू और सोया ग्रेन्यूल्स प्रोटीन से भरपूर होते हैं. इन्हें कम लागत में बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचाया जा सकता है. यही वजह है कि बड़े पोषण कार्यक्रमों में इन्हें एक बेस्ट ऑप्शन माना जाता है. सोयाबीन में कितना होता है प्रोटीन?100 ग्राम सूखे सोया चंक्स में लगभग 52 ग्राम प्रोटीन होता है. इसमें शरीर के लिए जरूरी सभी 9 अमीनो एसिड मौजूद होते हैं. साथ ही 100 ग्राम में करीब 13 ग्राम डाइटरी फाइबर पाया जाता है. इसमें फैट बहुत कम होती है. इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है. इसके अलावा वजन कंट्रोल रखने और हार्ट हेल्थ के लिए इसे अच्छा माना जाता है. स्कूलों के मिड-डे मील में अंडा क्यों शामिल किया गया?पिछले कई सालों में देश के कई राज्यों ने मिड-डे मील में अंडा शामिल किया गया है. यह सस्ता, आसानी से उपलब्ध और पोषक तत्वों से भरपूर होता है. एक अंडा बच्चों को सिर्फ प्रोटीन ही नहीं देता, बल्कि कई जरूरी पोषक तत्व भी उपलब्ध कराता है, जिनमें प्रोटीन, विटामिन B12, विटामिन D, कोलीन, हेल्दी फैट शामिल है. आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के खाने में इन पोषक तत्वों की अक्सर कमी देखी जाती है. इसलिए अंडा उनके लिए काफी उपयोगी माना जाता है. अंडे में मौजूद लगभग पूरा प्रोटीन शरीर आसानी से अवशोषित कर लेता है. यही कारण है कि पोषण विशेषज्ञ इसे सबसे प्रभावी प्रोटीन स्रोतों में गिनते हैं.यह भी पढ़ें - Oral Cancer: युवाओं में तेजी से बढ़ रहा ओरल कैंसर का खतरा, तंबाकू-वेपिंग बन रहे जानलेवा, जानें लक्षणअंडा, पनीर और सोया में कितना प्रोटीन?पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, एक अंडे में लगभग 6 ग्राम प्रोटीन होता है. वहीं लगभग 50 ग्राम पनीर में करीब 9 से 10 ग्राम प्रोटीन मिलता है. इसके अलावा 25 ग्राम सूखे सोया चंक्स में लगभग 13 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है. अगर केवल प्रोटीन की मात्रा देखी जाए तो सोया सबसे आगे है. इसके बाद पनीर और फिर अंडा आता है. पोषण विशेषज्ञों के मुताबिक प्रोटीन की क्वालिटी इस बात पर निर्भर करती है कि उसमें सभी जरूरी अमीनो एसिड मौजूद हैं या नहीं, शरीर उसे कितनी आसानी से पचा और यूज कर सकता है. इसी आधार पर अंडा लंबे समय से सबसे बेहतरीन प्रोटीन स्रोतों में गिना जाता है. अंडे में सभी जरूरी अमीनो एसिड लगभग पाए जाते हैं. साथ ही इसका प्रोटीन शरीर बहुत आसानी से पचा और अवशोषित कर लेता है. यही कारण है कि पोषण विज्ञान में अंडे के प्रोटीन को अक्सर मानक माना जाता है. अंडा या सोयाबीन प्रोटीन के मामले में ज्यादा ताकतवर कौन है?अगर सिर्फ प्रोटीन की मात्रा की बात करें तो सोया चंक्स अंडे से ज्यादा प्रोटीन देते हैं, लेकिन अगर प्रोटीन की क्वालिटी, पाचन क्षमता और ऑवर ऑल हेल्थ के लिए अंडा अब भी सबसे बेहतर माना जाता है. पनीर भी इस मामले में मजबूत ऑप्शन है, जबकि सोया उसके बाद आता है. सोया प्रोटीन का अच्छा स्रोत है, लेकिन अंडे में मौजूद कुछ पोषक तत्व पौधों से मिलने वाले खाने में या तो नहीं होते या बहुत कम मात्रा में पाए जाते हैं. इनमें मुख्य रूप से विटामिन B12 और कोलीन शामिल हैं. ऐसे में अगर अंडे की जगह केवल सोया दिया जाता है तो इन पोषक तत्वों की कमी पूरी करने के लिए खाने में दूसरे फूड आइटम्स शामिल करने होंगे. यह भी पढ़ें - Heart Health Tips : जिम या फिर योगा...दिल की सेहत के लिए क्या है बेहतर? एक्सपर्ट से जानें