अनुदान प्राप्त व सरकारी कॉलेजों में इन ब्रांच की सीमित सीटें है। जबकि प्राइवेट कालेजों ने ब्रांचों की सीटें बढ़ाई है। कई निजी कॉलेजों ने परंपरागत ब्रांच सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स भी बंद कर दी या सीटें कम कर दी।