पहले यह ज़मीन चीन के बजाय भारत को देने की योजना थी. लेकिन 2025 में मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने इसे भारत की सूची से हटा दिया. इस पर तारिक़ रहमान की सरकार ने भी मुहर लगा दी.