अब Space से आएगी बिजली! धरती तक Solar Power पहुंचाने की टेक्नोलॉजी कर देगी हैरान

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Solar Power from Space: आज के समय में सोलर एनर्जी लोगों की पहली पसंद बन चुकी है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि स्पेस में मौजूद सोलर पैनलों की मदद से बिजली सीधे धरती पर आ जाती तो कैसा रहता. जी हां, दरअसल, ये अब सपना नहीं रह गया, विज्ञान आज काफी तरक्की कर चुका है. आज दुनिया भर के वैज्ञानिक इस टेक्नोलॉजी को असल में बदलने का काम कर रही है. अब माना जा रहा है कि अगर ये टेक्नोलॉजी सफल होती है तो आगे आने वाले समय में पृथ्वी को लगातार बिजली मिल सकेगी. लेकिन अब सवाल ये है कि स्पेस में तैयार हुई बिजली को धरती तक लाया कैसे जाएगा. आइए जानते हैं इस नई टेक्नोलॉजी के बारे में विस्तार से.स्पेस से धरती तक बिजली पहुंचाना है चैलेंजअब सोलर एनर्जी के साथ एक चैलेंज भी है. दरअसल, स्पेस में सोलर पैनल से बिजली पैदा करना तो काफी आसान है लेकिन उसे धरती पर लाना ही सबसे बड़ी चुनौती है. कई सारे वैज्ञानिक कई सालों से ऐसी टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं जिसकी मदद से सोलर एनर्जी को स्पेस से धरती पर लाया जा सके. इसी को लेकर अभी दो तरीके काफी चर्चा का विषय बने हुए हैं.क्यों पड़ी सोलर एनर्जी को धरती पर लाने की जरुरतआपकी जानकारी के लिए बता दें कि आज कल घरों में लगे सोलर पैनलों के साथ कई सारी समस्याएं हैं. घरों में या फिर धरती पर मौजूद सभी सोलर पैनलों को मौसम के ऊपर निर्भर रहना पड़ता है. खराब मौसम, धूल या फिर किसी भी गंदगी के चलते कई बार सोलर पैनल सही तरीके से बिजली पैदा नहीं कर पाती है. लेकिन स्पेस में ऐसा बिलकुल भी नहीं है. दरअसल, स्पेस में मौजूद सोलर पैनल लगातार सूरज की रौशनी से बिजली पैदा करते रहते हैं. इसी वजह से ये टेक्नोलॉजी आगे आने वाले समय में धरती पर भी काफी सही साबित हो सकता है.क्या है लेजर टेक्नोलॉजीजिस टेक्नोलॉजी की चर्चा हो रही है उसे लेजर टेक्नोलॉजी कहा जाता है. इस तकनीक में इंफ्रारेड लेजर बीम का इस्तेमाल किया जाता है. जानकारी के अनुसार, इस टेक्नोलॉजी में सोलर एनर्जी को लेजर रेज के रूप में पृथ्वी की ओर भेजा जाता है. इतना ही नहीं इस ओर कुछ कंपनियां कई सफल टेस्ट भी कर चुकी हैं.इस लेजर सिस्टम का एक बड़ा फायदा ये है कि इसे जरूरत के अनुसार ज्यादा सटीक तरीके से कंट्रोल किया जा सकता है. इसके अलावा इसके मेंटेनेंस का खर्च भी काफी कम होता है.क्या है माइक्रोवेव तकनीकमीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ये टेक्नोलॉजी माइक्रोवेव पर आधारित है. इस टेक्नोलॉजी की मदद से सैटेलाइट सोलर एनर्जी को इकट्ठा करता है और उसे माइक्रोवेव सिग्नल में बदल देता है. इसके बाद धरती पर मौजूद रिसीवर तक उस सिग्नल को भेजा जाता है. इस टेक्नोलॉजी की सबसे बड़ी खास बात ये है कि कई माइक्रोवेव सिग्नल एक दिशा में केंद्रित किए जाते हैं जिससे एनर्जी खराब नहीं होती है और ट्रांसमिशन ज्यादा अच्छे तरीके से हो पाता है.  यह भी पढ़ें:क्या है UWB टेक्नोलॉजी, जानिए भविष्य में क्यों होने वाली है इसकी जरूरत?